poorva chalne ke baTohi

पुस्तकों में है नहीं
छापी गई इसकी कहानी
हाल इसका ज्ञात होता
है न औरों की जबानी

अनगिनत राही गए
इस राह से उनका पता क्या
पर गए कुछ लोग इस पर
छोड़ पैरों की निशानी

यह निशानी मूक होकर
भी बहुत कुछ बोलती है
खोल इसका अर्थ पंथी
पंथ का अनुमान कर ले।

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

यह बुरा है या कि अच्छा
व्यर्थ दिन इस पर बिताना
अब असंभव छोड़ यह पथ
दूसरे पर पग बढ़ाना

तू इसे अच्छा समझ
यात्रा सरल इससे बनेगी
सोच मत केवल तुझे ही
यह पड़ा मन में बिठाना

हर सफल पंथी यही
विश्वास ले इस पर बढ़ा है
तू इसी पर आज अपने
चित्त का अवधान कर ले।

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

– Harivansh Rai Bachan

I simply loved this poem.

Song of the day: Tera Hone laga hoon (Ajab prem ki gajab kahani)- Atif Aslam.

Book of the day: Tuesdays with Morrie.

PS: The next post will be on the book review of Tuesdays with Morrie 🙂

My first poem

कॉलेज के दिन बचे हैं चार
रंगों से सब पर बरसाओ प्यार
चाह कर भी ऐसे मौके नहीं आते बार बार
ये वक्त की कैसी आंखमिचोली है
आज तो रंग लगा लो यारों
बुरा न मानो होली है |

कहीं रंगों की बौछार
कहीं पिचकारी की धार
किसी के फटे कपडे तो किसी ने खायी खूब मार
बड़े ही उत्साह से रंगों के ये पुडिया हमने खोली है
आज तो रंग लगा ली यारों
बुरा न मानो होली है|

Book of the week: “The story of my experiments with truth” – Mahatma Gandhi.

PS: This is my first poem. 🙂 🙂 🙂
PS1: Stopped drinking/smoking after reading the book.
PS2: Feeling very nostalgic … 😦